नई दिल्ली, 19 अक्टूबर: दिवाली इस बार 8 नवंबर को मनाई जाएगी। गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के व्यापारी समुदाय में दिवाली का एक विशेष महत्व है — इस दिन चोपड़ा पूजन करके नए बहीखाते की शुरुआत की जाती है। चोपड़ा पूजन व्यापारियों के लिए नए वित्तीय वर्ष का शुभारंभ माना जाता है।
चोपड़ा पूजन की विधि के अनुसार दिवाली के दिन नए बहीखाते या लेजर बुक को लाल कपड़े में लपेटकर पूजा स्थल पर रखा जाता है। इस पर स्वस्तिक बनाकर ‘॥ श्री ॥’ लिखा जाता है और ‘शुभ लाभ’ अंकित किया जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। कलम-दवात की पूजा भी इस दिन विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि यही व्यापारी के कर्म के साधन हैं।
मान्यता है कि चोपड़ा पूजन के बाद बहीखाते में की गई पहली प्रविष्टि शुभ होती है। कई व्यापारी पहले पन्ने पर भगवान के नाम से कुछ राशि जमा दिखाते हैं। मारवाड़ी और गुजराती व्यापारियों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी बड़े उत्साह से निभाई जाती है।
डिजिटल युग में भले ही हिसाब-किताब कंप्यूटर पर होने लगा हो, लेकिन चोपड़ा पूजन की परंपरा आज भी जीवित है। कई व्यापारी डिजिटल खातों की शुरुआत से पहले प्रतीकात्मक रूप से बहीखाते का पूजन अवश्य करते हैं। यह परंपरा व्यापार में ईमानदारी और शुभ संकल्प का प्रतीक मानी गई है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता एवं लोक परंपरा

