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Navratri Ghatasthapana 2026: कलश स्थापना के 7 नियम — जौ बोने से अखंड ज्योति तक की विधि

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नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: नवरात्रि के पहले दिन होने वाली घटस्थापना पूरे नौ दिवसीय अनुष्ठान की नींव है। मान्यता है कि सही विधि से स्थापित कलश में मां दुर्गा का वास होता है और नौ दिनों तक घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। जानिए कलश स्थापना के 7 जरूरी नियम।

पहला, कलश स्थापना सुबह के शुभ मुहूर्त में करें — इसके लिए अपने शहर के पंचांग का समय देख लें। दूसरा, कलश के लिए साफ मिट्टी का पात्र या तांबे-पीतल का लोटा लें और उसमें गंगाजल मिला स्वच्छ जल भरें। तीसरा, कलश के मुख पर आम के पत्ते रखकर ऊपर नारियल स्थापित करें। चौथा, कलश के सामने मिट्टी के पात्र में जौ बोएं — नवरात्रि के नौ दिनों में इन जौओं का बढ़ना शुभ संकेत माना जाता है। पांचवां, कलश के पास अखंड ज्योति जलाएं और नौ दिनों तक उसे बुझने न दें। छठा, कलश स्थापना के स्थान को रोज साफ रखें और वहां जूते-चप्पल न ले जाएं। सातवां, नौ दिनों तक कलश को हिलाएं नहीं और रोज सुबह-शाम आरती-पूजन करें।

सामग्री में हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य शामिल करें। मान्यता है कि विधिपूर्वक स्थापित कलश घर के समस्त दोषों को दूर करता है।

स्रोत: धार्मिक मान्यता