Thakurdwara-उत्तर प्रदेश की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट (Thakurdwara Assembly Seat) पर इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है। मुरादाबाद जिले की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर एक नई बहस छिड़ गई है।
दरअसल, एक मीडिया संस्थान के सर्वे में सलाउद्दीन मंसूरी नाम के एक नेता को 83 प्रतिशत लोगों की पसंद बताया गया है। इस सर्वे के सामने आने और सलाउद्दीन मंसूरी द्वारा प्रेस वार्ता कर अपनी दावेदारी पेश करने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, चर्चा लोकप्रियता से ज्यादा उनकी ‘पहचान’ को लेकर हो रही है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता और आम लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं— “ये साहब आखिर हैं कौन?”

बता दें कि ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर पिछले करीब एक दशक से समाजवादी पार्टी का कब्जा है और नवाब जान खां यहां से विधायक हैं। हाल ही में आए कुछ अलग-अलग सर्वे के नतीजों ने यहां की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। UPUKLive के ऑनलाइन सर्वे में जहां 2022 का चुनाव बसपा से लड़ने वाले मुजाहिद अली को लोगों ने सबसे ज्यादा पसंद किया, वहीं एक अन्य मीडिया संस्थान के सर्वे में हाजी सलाउद्दीन मंसूरी को 83 प्रतिशत जनता का समर्थन मिलने का दावा किया गया। इन दोनों ही सर्वे में एक बात गौर करने वाली रही कि मौजूदा विधायक नवाब जान को पसंद करने वाले लोगों की संख्या पहले के मुकाबले कम नजर आई।

सर्वे के आंकड़ों और जमीनी पहचान के बीच उलझी जनता
दरअसल, राजनीति में आंकड़ों का अपना महत्व होता है, लेकिन जब ये आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते, तो सवाल उठना लाजिमी है। सलाउद्दीन मंसूरी ने जैसे ही ठाकुरद्वारा पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपनी सक्रियता दिखाई, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद समाजवादी पार्टी के संगठन से जुड़े लोग ही सलाउद्दीन मंसूरी के नाम से अनजान नजर आए। विधायक नवाब जान खां के करीबी माने जाने वाले सपा के ठाकुरद्वारा विधानसभा महासचिव फुरकान सिद्दीकी ने सोशल मीडिया पर सीधा सवाल दागते हुए लिखा, “ये कौन साहब हैं? मैं इनको नहीं जानता हूं। विधानसभा 26 ठाकुरद्वारा में समाजवादी पार्टी का संगठन इनको जानता ही नहीं है।” फुरकान का यह कमेंट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पार्टी के भीतर की कशमकश को बयां कर रहा है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘पहचान’ की जंग
सलाउद्दीन मंसूरी की दावेदारी और उनकी लोकप्रियता के दावों पर स्थानीय लोगों ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, वह काफी दिलचस्प है। मुनीर अली नाम के एक यूजर ने लिखा, “ये कौन साहब हैं? कहां से आए हैं, आज से पहले मैंने इनको नहीं देखा है।” वहीं, इकराम खान ने तंज कसते हुए लिखा, “भाई बरसात आने वाली है,” जो सीधे तौर पर चुनाव के समय सक्रिय होने वाले नेताओं की ओर इशारा था।
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वहीं चमन कश्यप ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “हमें क्षेत्र में रहते हुए 17 साल हो गए, लेकिन पहले कभी इनको नहीं देखा, ये नया नमूना कौन है?”
क्या ठाकुरद्वारा में विकल्प की तलाश कर रहे हैं कार्यकर्ता?
समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि पार्टी को किसी मजबूत चेहरे को चुनाव मैदान में उतारना चाहिए, लेकिन सलाउद्दीन मंसूरी जैसे नाम अचानक से सामने आने पर वे सहज नहीं हैं। साजिद मलिक ने लिखा, “जब हम इन्हें जानते ही नहीं हैं, तो हम कैसे कह दें कि ये वाले सही हैं।” वहीं बिलाल उद्दीन शेख ने सुझाव दिया कि पार्टी को कोई अच्छा और जाना-पहचाना उम्मीदवार उतारना चाहिए।
मोहम्मद इदरीस जैसे कुछ लोगों का कहना है कि सलाउद्दीन मंसूरी पुराने समाजवादी नेता हैं, लेकिन उनके इस दावे को अधिकांश लोगों का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा। शेरा खां जैसे स्थानीय लोग सोशल मीडिया के इन दावों को संदेह की नजर से देख रहे हैं। उनका कहना है कि मीडिया पर आजकल कुछ भी लिखवा लेना आसान है, लेकिन हकीकत में जनता के बीच पहचान बनाना अलग बात है।
फिलहाल, ठाकुरद्वारा में समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी को लेकर मची यह रार थमने का नाम नहीं ले रही है। अब देखना यह होगा कि समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला लेता है।