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Haridwar Ganga Snan-हर-हर गंगे’ के जयकारों से गूंजी धर्मनगरी, तड़के 4 बजे से ही डुबकी लगाने लगे लाखों भक्त

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Haridwar Ganga Snanभीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच देवभूमि उत्तराखंड से आस्था का एक अद्भुत और विहंगम नजारा सामने आया है। धर्मनगरी हरिद्वार में निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर Haridwar Ganga Snan करने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। आलम यह था कि ब्रह्म मुहूर्त यानी तड़के सुबह 4 बजे से ही हर की पैड़ी समेत तमाम प्रमुख घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। हर कोई बस एक बार मां गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाने को आतुर नजर आ रहा था।

दरअसल, सनातन धर्म में साल भर की सभी एकादशियों में ‘निर्जला एकादशी’ को सबसे श्रेष्ठ और पुण्य फलदायी माना जाता है। यही वजह है कि आज सुबह-सुबह महज 4 घंटे के भीतर ही करीब एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मोक्ष की कामना लिए पतित पावनी गंगा में स्नान किया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे घाटों पर भीड़ का दबाव भी लगातार बढ़ता गया। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में इस पर्व को लेकर गजब का उत्साह और श्रद्धा देखी गई।

हर की पैड़ी पर तड़के से ही गूंजे ‘हर-हर गंगे’ के जयकारे

बताया जा रहा है कि एकादशी से एक दिन पहले ही यानी बीती शाम से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचने लगे थे। होटलों से लेकर धर्मशालाओं तक में भारी भीड़ जमा हो गई थी। आज सुबह 4 बजे जब मंदिरों के कपाट खुले और गंगा आरती की तैयारियां शुरू हुईं, तब तक हर की पैड़ी का पूरा इलाका खचाखच भर चुका था। चारों तरफ से आ रही ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां गंगे’ की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार निर्जला एकादशी पर श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। घाटों के किनारे बैठे पुरोहितों का भी यही कहना है कि इतनी सुबह इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के इस चकाचौंध भरे दौर में भी लोगों की अपनी जड़ों और परंपराओं के प्रति गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

क्यों खास है निर्जला एकादशी पर Haridwar Ganga Snan?

असल में, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति साल भर की 24 एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह अगर सिर्फ निर्जला एकादशी का उपवास रख ले और गंगा स्नान कर दान-पुण्य करे, तो उसे सभी एकादशियों के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है। इसी अटूट विश्वास के चलते दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत देश के कोने-कोने से लोग इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने पहुंचते हैं। भीषण गर्मी में बिना जल ग्रहण किए इस व्रत को रखना बेहद कठिन होता है, लेकिन मां गंगा में एक डुबकी श्रद्धालुओं की सारी थकान मिटा देती है।

चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद दिखी पुलिस, कड़े किए गए सुरक्षा इंतजाम

इतनी भारी तादाद में उमड़ी भीड़ को देखते हुए हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने पहले से ही कमर कस ली थी। भीड़ नियंत्रण के लिए पूरे मेला क्षेत्र को अलग-अलग जोन और सेक्टरों में बांटा गया था। जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों को घाटों पर तैनात रखा गया है ताकि किसी भी तरह के डूबने या हादसे की स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। इसके अलावा, शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए शहर के बाहर से ही भारी वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया गया था।

कुल मिलाकर, निर्जला एकादशी का यह पावन पर्व हरिद्वार में पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। भीषण गर्मी की परवाह किए बिना जिस तरह से लाखों की संख्या में भक्तों ने गंगा मइया की शरण ली है, वह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की उस गहरी नींव को दर्शाता है जिसे कोई भी मौसम या परिस्थिति डिगा नहीं सकती।