Video-Amroha में महाराज ने इतनी ठंड में कांपते शरीर से की 108 कलशों के स्नान की तपस्या शुरू

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Amroha Tapasya-अमरोहा जिले में इन दिनों सर्दी का कहर जारी है। पारा 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है और लोग घरों में दुबके बैठे हैं। लेकिन इसी ठंड में एक ऐसी घटना हो रही है जो हर किसी को हैरान कर रही है। नर्मदेश्वर बालाजी आश्रम के महाराज चंद्र किरण आज से अपनी अद्भुत तपस्या शुरू कर रहे हैं। ये तपस्या कोई साधारण नहीं है, बल्कि 108 ठंडे पानी के कलशों से की जा रही है। आइए जानते हैं इस तपस्या के बारे में विस्तार से, जो भक्तों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

तपस्या की शुरुआत: आज से हो रहा आरंभ

अमरोहा के अख्तियारपुर स्थित नर्मदेश्वर बालाजी आश्रम में आज से महाराज चंद्र किरण की तपस्या शुरू हो गई है। ये आश्रम शहर की हलचल से थोड़ा दूर एक शांत जगह पर है, जहां भक्त रोजाना आकर पूजा-अर्चना करते हैं। महाराज की ये तपस्या भगवान बालाजी को समर्पित है और इसमें ठंडे पानी का इस्तेमाल हो रहा है। जिले में बढ़ती ठंड के बीच ये तपस्या और भी खास बन जाती है, क्योंकि बाहर का मौसम इतना ठंडा है कि लोग बाहर निकलने से भी कतराते हैं। लेकिन महाराज इस ठंड को अपनी इच्छाशक्ति से चुनौती दे रहे हैं। भक्त बताते हैं कि ऐसी तपस्या से न सिर्फ आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि ये भगवान की कृपा प्राप्त करने का एक माध्यम भी है। आश्रम में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई है, जो महाराज की इस साधना को देखने और उसमें हिस्सा लेने के लिए उत्सुक हैं।

ये तपस्या आज से शुरू हो रही है, लेकिन इसकी तैयारी कई दिनों से चल रही थी। महाराज चंद्र किरण लंबे समय से आश्रम में रहकर भक्ति और साधना में लीन हैं। उनकी ये तपस्या आम लोगों के लिए एक प्रेरणा है, जो दिखाती है कि कितनी मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान अपनी आस्था को मजबूत रख सकता है। अमरोहा जैसे छोटे शहर में ऐसी घटनाएं लोगों को एकजुट करती हैं और धार्मिक उत्साह बढ़ाती हैं। ठंड के इस मौसम में जब हर कोई गर्म कपड़ों और हीटरों में छिपा है, तब महाराज की ये तपस्या एक अलग ही मिसाल पेश कर रही है।

108 ठंडे पानी के कलश: तपस्या का मुख्य हिस्सा

महाराज की तपस्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है 108 ठंडे पानी के कलश। ये कलश ठंडे पानी से भरे जाते हैं और इनसे महाराज स्नान करते हैं। 108 की संख्या हिंदू धर्म में बहुत पवित्र मानी जाती है, क्योंकि ये भगवान की माला के मनकों की तरह है। ठंड इतनी ज्यादा है कि पानी बर्फ जैसा लगता है, लेकिन महाराज बिना किसी शिकायत के इस तपस्या को कर रहे हैं। जिले में पारा 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे ठंड और भी कड़क हो गई है। ऐसे में ये तपस्या वाकई अद्भुत है, जो महाराज की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाती है।

भक्तों का कहना है कि ऐसी तपस्या से न सिर्फ शरीर मजबूत होता है, बल्कि मन भी शांत रहता है। आश्रम में आने वाले लोग बताते हैं कि महाराज की ये साधना देखकर उन्हें भी अपनी जिंदगी में मुश्किलों से लड़ने की हिम्मत मिलती है। ठंड के बीच ये कलशों से स्नान करना आसान नहीं है, लेकिन महाराज इसे बड़ी आसानी से कर रहे हैं। ये दृश्य देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। अमरोहा के लोग, जो रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहते हैं, ऐसी घटनाओं से जुड़कर अपनी आस्था को और मजबूत करते हैं।

शाम की तैयारी: कलशों को भरना

तपस्या की शुरुआत से पहले शाम को एक खास तैयारी होती है। शाम के समय 108 कलशों को ठंडे पानी से भरकर रखा जाता है। ये कलश आश्रम के एक विशेष स्थान पर रखे जाते हैं, जहां रात भर ठंडी हवा उन्हें और ठंडा कर देती है। शाम का समय चुना गया है क्योंकि तब सूरज ढल चुका होता है और ठंड बढ़ने लगती है। भक्त इस तैयारी में हिस्सा लेते हैं और कलश भरने में मदद करते हैं। ये प्रक्रिया बड़ी सावधानी से की जाती है, ताकि पानी बिल्कुल शुद्ध और ठंडा रहे।

अमरोहा में शाम के समय ठंड और बढ़ जाती है, जिससे ये तैयारी और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लेकिन आश्रम के लोग इसे एक उत्सव की तरह मनाते हैं। शाम को कलश भरते समय मंत्रों का जाप होता है, जो वातावरण को और पवित्र बना देता है। महाराज चंद्र किरण खुद इस प्रक्रिया की निगरानी करते हैं, ताकि सब कुछ सही तरीके से हो। ये शाम की रूटीन तपस्या का एक अहम हिस्सा है, जो अगले दिन की साधना के लिए आधार तैयार करती है।

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सुबह तीन बजे शुरू होती तपस्या

तपस्या का मुख्य भाग सुबह तीन बजे शुरू होता है। इस समय चंद्र किरण महाराज अपनी साधना आरंभ करते हैं। सुबह का ये समय बहुत शांत होता है, जब पूरा शहर सो रहा होता है। महाराज 108 कलशों से ठंडे पानी से स्नान करते हैं, जो ठंड के कारण बेहद कठिन है। लेकिन उनकी आस्था इतनी मजबूत है कि वे इसे बिना रुके पूरा करते हैं। जिले में 4 डिग्री की ठंड में ये तपस्या एक चमत्कार जैसी लगती है।

सुबह तीन बजे आश्रम में भक्त जमा हो जाते हैं, जो महाराज की तपस्या देखते हैं। ये दृश्य बड़ा ही मनमोहक होता है, जहां चंद्रमा की किरणें आश्रम को रोशन करती हैं। इसलिए इसे चंद्र किरण महाराज की तपस्या भी कहा जाता है। भक्त बताते हैं कि इस समय की साधना से विशेष ऊर्जा मिलती है। अमरोहा के अख्तियारपुर आश्रम में ये तपस्या चल रही है, जो पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

अमरोहा के अख्तियारपुर आश्रम में हो रही तपस्या

पूरी तपस्या अमरोहा के अख्तियारपुर आश्रम में चल रही है। ये आश्रम नर्मदेश्वर बालाजी को समर्पित है और यहां साल भर धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। महाराज चंद्र किरण यहां के मुख्य संचालक हैं, जो भक्तों को मार्गदर्शन देते हैं। ठंड के इस मौसम में आश्रम और भी जीवंत हो उठा है, क्योंकि तपस्या के कारण भक्तों की संख्या बढ़ गई है।

अमरोहा जिला उत्तर प्रदेश का एक छोटा लेकिन धार्मिक महत्व वाला इलाका है। यहां के लोग सरल जीवन जीते हैं और ऐसी तपस्याओं से जुड़कर खुशी महसूस करते हैं। आश्रम में आने वाले लोग बताते हैं कि महाराज की ये साधना उन्हें जीवन के कष्टों से लड़ने की प्रेरणा देती है। ठंड में पारा गिरने के बावजूद, आश्रम का माहौल गर्मजोशी से भरा है। भक्त एक-दूसरे से बातें करते हैं और तपस्या के महत्व पर चर्चा करते हैं।

ये तपस्या न सिर्फ महाराज की व्यक्तिगत साधना है, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक संदेश है। ठंड के बीच इतनी कठिन तपस्या करना आसान नहीं, लेकिन ये दिखाता है कि आस्था कितनी शक्तिशाली हो सकती है। अमरोहा के लोग इसे एक उत्सव की तरह देख रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा हो रही है। महाराज चंद्र किरण की ये तपस्या आने वाले दिनों में और भी लोगों को आकर्षित करेगी।