मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
सब-हेडलाइन: कांठ थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव की घटना; गन्ने के खेत में घात लगाए बैठे तेंदुए ने किया हमला। गंभीर हालत में बच्चा मेरठ रेफर। एक महीने के भीतर तेंदुए के हमले की यह चौथी बड़ी घटना, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट।
मुरादाबाद/कांठ: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में आदमखोर तेंदुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन तेंदुए ग्रामीण इलाकों में घुसकर मासूम बच्चों को अपना निवाला बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ताजा और दिल दहला देने वाला मामला कांठ थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव से सामने आया है, जहां शनिवार शाम गन्ने के खेत में एक तेंदुए ने 3 साल के मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला कर दिया। हालांकि, बच्चे के माता-पिता की बहादुरी से मासूम की जान तो बच गई, लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो गया है।
घात लगाकर बैठा था तेंदुआ, अचानक किया हमला
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5:30 से 6:00 बजे के बीच दरियापुर गांव निवासी सुनील कुमार और उनकी पत्नी विमलेश अपने 3 वर्षीय बेटे हर्ष के साथ गन्ने के खेत में निराई-गुड़ाई का काम कर रहे थे।
- हमले का मंजर: इसी दौरान खेत के पास पहले से घात लगाकर बैठा तेंदुआ मौके की तलाश में था। जैसे ही माता-पिता अपने बच्चे से थोड़ी दूरी पर हुए, तेंदुए ने अचानक झपट्टा मारा और मासूम हर्ष को अपने खूंखार जबड़े में दबोच लिया।
माता-पिता ने दिखाई अदम्य गवाही, औजारों से किया वार
अपने जिगर के टुकड़े की चीख सुनकर माता-पिता के होश उड़ गए, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय अदम्य साहस का परिचय दिया। सुनील और विमलेश ने बताया, “हम खेत में काम कर रहे थे, तभी अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। हमारे हाथ में जो कृषि औजार था, हमने अपनी जान की परवाह किए बिना उसी से तेंदुए के मुंह और सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।” माता-पिता के इस कड़े पलटवार और शोर मचाने पर तेंदुआ घबरा गया और बच्चे को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला।
गंभीर हालत में मेरठ रेफर हुआ मासूम
तेंदुए के खूंखार जबड़े में फंसने के कारण बच्चा बुरी तरह लहूलुहान हो गया था। परिजन आनन-फानन में उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर हालत और गहरे घावों को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर (मेरठ) के लिए रेफर कर दिया है।
एक महीने में चौथा हमला, वन विभाग का स्पष्टीकरण
इस घटना के बाद से दरियापुर और आसपास के गांवों में भारी दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खेतों में काम करना तो दूर, बच्चों का घर से बाहर निकलना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है।
- लगातार हो रहे हमले: गौरतलब है कि मुरादाबाद में मात्र एक महीने के भीतर तेंदुए के हमले में यह चौथा बच्चा घायल हुआ है। इससे पहले ठाकुरद्वारा के गांव दलपतपुर और कांठ के ही तीन अन्य गांवों में बच्चों पर हमले हो चुके हैं।
- कहां से आ रहे हैं तेंदुए? मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में नदियों की बहुतायत होने के कारण तेंदुओं की तादाद बढ़ रही है। उत्तराखंड से लगे पतरामपुर के जंगलों, अमानगढ़ और कालागढ़ से तेंदुए नदी के रास्ते आसानी से इन गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।
वन विभाग ने ग्रामीणों को समूह में खेतों की ओर जाने और सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी है। वहीं, ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पिंजरा लगाकर इस आदमखोर तेंदुए को पकड़ने की पुरजोर मांग की है।