मुरादाबाद जेल में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल, सलाखों के पीछे एक साथ मनाए जा रहे होली और रमजान

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मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ 

जेल प्रशासन ने पेश की नजीर; बंदियों के लिए रंग-गुलाल के साथ सहरी और इफ्तार का किया गया विशेष प्रबंध

मुरादाबाद | क्षेत्रीय समाचार डेस्क त्योहारों का असली रंग आपसी भाईचारे और प्रेम में बसता है, और इसकी एक बेहद खूबसूरत व अनोखी तस्वीर इन दिनों मुरादाबाद स्थित ‘जिला कारागार’ (District Jail Moradabad) में देखने को मिल रही है। इस वर्ष रंगों का पावन पर्व होली और पवित्र माह रमजान एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे में जेल प्रशासन ने धर्म और आस्था का सम्मान करते हुए सामाजिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ जमकर सराहना हो रही है।

रंगों और इबादत का अद्भुत संगम

जेल की ऊंची दीवारों के भीतर बंदियों के लिए प्रशासन ने दोनों प्रमुख त्योहारों को शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण तरीके से मनाने की विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं:

  • होली के लिए खास इंतजाम: हिंदू बंदियों के लिए होली के अवसर पर सीमित और सुरक्षित मात्रा में रंग-गुलाल की व्यवस्था की गई है। इस पहल का उद्देश्य यह है कि बंदी अनुशासन के कड़े दायरे में रहकर भी पर्व की खुशियों से अछूते न रहें और मुख्यधारा से जुड़ाव महसूस करें।
  • रोजेदारों के लिए सहरी और इफ्तार: रमजान के पवित्र महीने को ध्यान में रखते हुए, मुस्लिम रोजेदारों के लिए प्रशासन ने समय के अनुसार सहरी और इफ्तार का विशेष प्रबंध किया है। रोजा खोलने के लिए खजूर, फल और अन्य सामग्रियों के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों (जैसे हलवा-पूरी) का भी वितरण किया जा रहा है।

सुरक्षा और अनुशासन का रखा गया पूरा ध्यान

जेल प्रशासन ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि इस पूरे आयोजन के दौरान जेल के सुरक्षा मानकों (Security Protocols) का कड़ाई से पालन हो।

  • अधिकारियों की देखरेख में सभी कार्यक्रम संपन्न कराए जा रहे हैं ताकि व्यवस्था भंग न हो और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
  • बंदियों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए पूरे अनुशासन और भाईचारे के साथ त्योहारों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई है।

सलाखों के पीछे से समाज को एक बड़ा संदेश

मुरादाबाद जिला जेल प्रशासन की यह संवेदनशील पहल समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। यह दर्शाती है कि त्योहार वास्तव में आपसी भाईचारे, शांति और सौहार्द के प्रतीक हैं— चाहे वे खुले आसमान के नीचे मनाए जाएं या फिर जेल की सलाखों और ऊंची दीवारों के भीतर।