भूत नहीं, तुम्हारा बेटा हूं… तेरहवीं के अगले दिन जिंदा लौटा मुर्दा बेटा, जाने पूरे मामला

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Ghaziabad-फिल्मी पर्दे पर आपने अक्सर ऐसे दृश्य देखे होंगे जहां मृत मान लिया गया कोई शख्स अचानक जिंदा होकर लौट आता है। लेकिन क्या हो जब यह कहानी असल जिंदगी में सच हो जाए? गाजियाबाद से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक परिवार ने जिस जवान बेटे की मौत का मातम मनाया, जिसकी लाश का पूरे हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया और जिसकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं तक कर दी, वही बेटा अगले दिन सही-सलामत अपने घर के दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया।

इस अकल्पनीय घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जैसे ही बेटे ने घर की चौखट पर कदम रखा, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें फटी की फटी रह गईं। मां तो अपने लाल को जिंदा देखकर बदहवास सी हो गई और दौड़कर उससे लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगी। इस पूरे Ghaziabad Dead Body Case ने पुलिस और प्रशासन के सामने भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ghaziabad Dead Body Case: आखिर कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?

दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम किसी बड़ी गलतफहमी का नतीजा बताया जा रहा है। कुछ दिनों पहले इस परिवार का बेटा अचानक घर से लापता हो गया था। परिजनों ने उसे हर संभावित जगह पर ढूंढा, रिश्तेदारों से पूछताछ की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच, गाजियाबाद में पुलिस को एक अज्ञात शव बरामद हुआ।

शव की हालत शायद ऐसी थी कि उसकी पहचान करना आसान नहीं था। जब पुलिस ने गुमशुदा लोगों के रिकॉर्ड खंगाले और इस परिवार को शिनाख्त के लिए बुलाया, तो दुख और घबराहट में डूबे परिजनों ने कपड़ों या कद-काठी के आधार पर उस लाश को अपना बेटा मान लिया। असल में, अपनों को खोने के डर और मानसिक तनाव के बीच अक्सर ऐसी मानवीय भूल हो जाती है। परिजनों ने नम आंखों से उस अज्ञात शव को अपने कलेजे का टुकड़ा मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

तेरहवीं के ठीक एक दिन बाद दरवाजे पर दी दस्तक

बताया जा रहा है कि घर में शोक का माहौल था। रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था। बेटे की मौत का दुख बर्दाश्त करना परिवार के लिए आसान नहीं था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अंतिम संस्कार के बाद होने वाले सभी कर्मकांड पूरे किए गए। यहां तक कि मृतक की आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं का आयोजन भी हो चुका था।

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। तेरहवीं के ठीक एक दिन बाद, घर के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। जब दरवाजा खुला, तो सामने वही बेटा खड़ा था जिसके जाने का शोक पूरा घर मना रहा था। पहले तो घरवालों को लगा कि शायद वे कोई सपना देख रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस वक्त घर का नजारा देखने लायक था। गम में डूबी मां की चीख निकल गई और वह तुरंत अपने बेटे को बांहों में भरकर रोने लगी। खुशी और अचरज का यह मिला-जुला पल वहां मौजूद हर इंसान की आंखों में आंसू ले आया।

पुलिस के सामने खड़ा हुआ नया और बड़ा सवाल

अब जबकि बेटा सुरक्षित अपने घर लौट आया है, परिवार में खुशियों का माहौल है। लेकिन इस घटना ने कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा पेंच फंसा दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गाजियाबाद में जिस लाश का अंतिम संस्कार इस परिवार ने किया, वह आखिर किसकी थी?

पुलिस अब इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच करने में जुट गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह अज्ञात शव किसका था और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई थी। इसके लिए आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट दोबारा खंगाली जा रही हैं।

यह घटना अपने आप में इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि हकीकत कई बार कहानियों से भी ज्यादा चौंकाने वाली होती है। फिलहाल, मां की ममता जीत गई है और उसका खोया हुआ लाल उसकी आंखों के सामने है, लेकिन पुलिस के लिए उस ‘अज्ञात’ की पहेली सुलझाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।