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Uttarakhand News-देवभूमि में नहीं बचेंगे अतिक्रमणकारी! देहरादून से सीएम धामी ने दे दिया सबसे बड़ा अल्टीमेटम

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Uttarakhand Encroachment Action : ‘उत्तराखंड को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता, लेकिन पिछले कुछ समय से यहां पनप रहे अवैध कब्जों ने राज्य सरकार और आम जनमानस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी गंभीर मुद्दे पर अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। राजधानी देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्य भर में सरकारी और वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहा अभियान किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। Uttarakhand Encroachment Action को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

असल में, पिछले कई महीनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है। इस कार्रवाई को लेकर कई तरह की राजनीतिक बयानबाजी और विरोध भी देखने को मिला है। लेकिन इन सबके बीच मुख्यमंत्री ने दो टूक संदेश दिया है कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष या समुदाय के खिलाफ लक्षित नहीं है, बल्कि देवभूमि की पवित्रता और उसके मूल स्वरूप को बचाने की एक बड़ी और जरूरी मुहिम है। उन्होंने साफ किया कि हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, शांत और स्वच्छ उत्तराखंड सौंपना है।

देवभूमि के डेमोग्राफिक बदलाव पर पैनी नजर

दरअसल, पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड के कई संवेदनशील और पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी लोगों द्वारा अवैध रूप से जमीनें कब्जाने और वहां रातों-रात निर्माण करने के कई मामले सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इन कब्जों की वजह से कई इलाकों का डेमोग्राफिक ढांचा भी तेजी से बदलने लगा था। सरकार की मानें तो इसी मंडराते खतरे को भांपते हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान की सख्त रूपरेखा तैयार की गई। मुख्यमंत्री का मानना है कि अगर आज इस प्रवृत्ति को कड़ाई से नहीं रोका गया, तो भविष्य में इसके बेहद गंभीर परिणाम राज्य को भुगतने पड़ सकते हैं।

Uttarakhand Encroachment Action: प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश

अवैध कब्जों के खिलाफ इस महाअभियान को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने के लिए सभी जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। शासन स्तर से यह बारीकी से सुनिश्चित किया जा रहा है कि जो भी सरकारी या वन भूमि भूमाफियाओं के चंगुल से मुक्त कराई जा रही है, उस पर दोबारा कोई अतिक्रमण न हो सके। वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार इस मोर्चे पर डटी हुई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशकों से जिन बहुमूल्य जमीनों पर रसूखदारों का अवैध कब्जा था, आज वे भी बिना किसी भेदभाव के प्रशासन के राडार पर आ गए हैं।

आने वाली पीढ़ियों के प्रति जवाबदेही

सीएम धामी का यह कड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सख्त भू-कानून लागू करने को लेकर भी व्यापक बहस छिड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने बड़ी ही बेबाकी से मंच से कहा है कि हम आज जो भी कड़े फैसले ले रहे हैं, उनका सीधा और सकारात्मक असर उत्तराखंड के भविष्य पर पड़ेगा। अगर देवभूमि के जंगलों, नदियों के किनारों और सरकारी जमीनों को आज अतिक्रमणकारियों से मुक्त नहीं कराया गया, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। यह सिर्फ चंद एकड़ जमीन बचाने की लड़ाई कतई नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सहेजने का एक भागीरथ प्रयास है।

कुल मिलाकर, देहरादून से उठी सीएम धामी की यह सख्त आवाज इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आने वाले दिनों में अतिक्रमणकारियों की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली हैं। सरकार ने अपने इरादे बिल्कुल साफ कर दिए हैं कि देवभूमि में किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि या अवैध कब्जे के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं बची है। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन इस महाअभियान को आगे कितनी सख्ती और पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारता है, ताकि मुख्यमंत्री के ‘सुरक्षित उत्तराखंड’ का विजन पूरी तरह से साकार हो सके।