देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति हमेशा से ही जल, जंगल और जमीन से गहराई से जुड़ी रही है। यहां का प्रसिद्ध लोकपर्व ‘हरेला’ प्रकृति के प्रति इसी प्रेम और आभार का सबसे खूबसूरत उदाहरण है। लेकिन इस साल यह पर्व केवल पारंपरिक पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। असल में, इस बार का हरेला पर्व राज्य में पर्यावरण संरक्षण के एक ऐतिहासिक महाभियान का गवाह बनने जा रहा है, जिसकी चर्चा अभी से पूरे प्रदेश में जोरों पर है।
आगामी 16 जुलाई को उत्तराखंड में अब तक का सबसे बड़ा हरित अभियान (Uttarakhand Green Campaign) चलाया जाएगा। राज्य सरकार और वन विभाग ने मिलकर एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसके तहत पूरे प्रदेश में एक ही दिन में रिकॉर्ड 10 लाख पौधे रोपे जाएंगे। इस महाभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर परिवार को बिल्कुल मुफ्त में पौधे उपलब्ध कराएगी।
Uttarakhand Harela Festival पर चलेगा महाभियान
दरअसल, हाल ही में पहाड़ों पर बढ़ती गर्मी और जंगलों में धधकती आग की घटनाओं ने पर्यावरण को लेकर कई चिंताएं पैदा कर दी थीं। बताया जा रहा है कि इसी डैमेज को कंट्रोल करने और हरियाली को वापस लौटाने के लिए 16 जुलाई को यह वृहद पौधारोपण अभियान छेड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हरेला के मौके पर पौधे लगाने की परंपरा तो सदियों पुरानी है, लेकिन सरकारी स्तर पर एक ही दिन में 10 लाख पौधे लगाने का यह लक्ष्य अपने आप में बेहद अनूठा और ऐतिहासिक कदम है।
हर परिवार तक फ्री में पहुंचेंगे पौधे
वन विभाग ने इस बड़े लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए अभी से अपनी कमर कस ली है। प्रदेश भर की विभिन्न नर्सरियों में लाखों की संख्या में पौधे तैयार किए जा चुके हैं। इस अभियान की सफलता पूरी तरह से आम जनमानस के जुड़ने पर निर्भर है। यही वजह है कि वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय प्रशासन गांव-गांव और शहर-शहर जाकर हर परिवार को फलदार, औषधीय और छायादार पौधे निःशुल्क बांटेंगे। लोगों से अपील की जा रही है कि वे इन पौधों को अपने घर के आंगन, खेतों की मेड़ या फिर आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर लगाएं और उनके बड़े होने तक उनकी उचित देखभाल भी करें।
आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य
हरेला पर्व का मूल संदेश ही हरियाली और समृद्धि का विस्तार करना है। ऐसे में इस बड़े पैमाने पर होने वाले पौधारोपण से न केवल राज्य के घटते वन क्षेत्र में सुधार होगा, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौती से लड़ने में उत्तराखंड का एक छोटा लेकिन बेहद अहम योगदान भी साबित होगा। मुफ्त पौधे बांटने की इस योजना से बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी वर्गों में प्रकृति के प्रति एक नई जागरूकता देखने को मिल रही है।
कुल मिलाकर, 16 जुलाई का दिन उत्तराखंड की आबोहवा के लिए एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। अगर आप भी उत्तराखंड के वासी हैं, तो इस महाभियान का हिस्सा बनने से न चूकें। वन विभाग से अपना मुफ्त पौधा जरूर लें और प्रकृति का कर्ज चुकाने की इस मुहिम में अपना एक छोटा सा योगदान जरूर दें।