नई दिल्ली, 6 अक्टूबर: 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें सूर्योदय से चांद निकलने तक निर्जल उपवास रखा जाता है। जानिए व्रत के 7 जरूरी नियम।
पहला, व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है — यह सास की ओर से बहू को दिया गया भोजन होता है। दूसरा, सरगी के बाद पूरे दिन न अन्न, न जल ग्रहण किया जाता है। तीसरा, शाम को सोलह शृंगार करके करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। चौथा, कथा के समय मिट्टी के करवे में जल भरकर पूजा की जाती है। पांचवां, चांद निकलने पर छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखा जाता है। छठा, चांद को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है — परंपरा के अनुसार पति के हाथ से जल पीकर पारण किया जाता है। सातवां, व्रत के दिन क्रोध और कटु वचन से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं और बीमार महिलाओं को अपनी सेहत के अनुसार व्रत में छूट लेने की सलाह ज्योतिषी भी देते हैं। व्रत के दिन भगवान शिव, मां पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा की जाती है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता

