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हर की पैड़ी पर गंगा घटी तो मचा हड़कंप, असली वजह जानकर मिलेगी राहत

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हरिद्वार, 28 अक्टूबर: हरिद्वार की हर की पैड़ी पर गंगा का घटा हुआ जलस्तर देखकर सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें सूखा दिखता घाट देखकर श्रद्धालुओं में चिंता फैल गई। लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि गंगा सूख नहीं रही है। दरअसल, हर साल की तरह इस बार भी गंगा नहर की वार्षिक बंदी चल रही है, जो 20 अक्टूबर की आधी रात से शुरू होकर 8 नवंबर तक चलेगी। इस दौरान नहर का पानी रोककर सफाई, गाद निकालने और तटबंधों की मरम्मत का काम किया जाता है।

ऊपरी गंगा नहर हरिद्वार से कानपुर तक करीब 560 किलोमीटर लंबी है। हर साल दीपावली से पहले इसका प्रवाह रोक दिया जाता है, ताकि बरसात के बाद जमा हुई भारी गाद को हटाया जा सके और तटबंधों की कमजोर कड़ियों को ठीक किया जा सके। इस बार यह बंदी आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के लिहाज से भी अहम है, क्योंकि मेले से पहले नहर और घाटों का ढांचा दुरुस्त होना जरूरी है। यही वजह है कि हर की पैड़ी के कुछ हिस्सों में नदी तल दिखाई दे रहा है और श्रद्धालु सीढ़ियों पर छोटे बर्तनों से स्नान कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ब्रह्मकुंड जैसे केंद्रीय स्थानों पर बुनियादी जलापूर्ति जारी रखने के आदेश दिए गए हैं। उपखंड अधिकारी भारत भूषण के हवाले से बताया गया है कि मैदानी अमले को केंद्रीय स्थलों पर न्यूनतम पानी उपलब्ध कराने के निर्देश मिले हैं। फिर भी, कुछ हिस्सों में तल दिखना स्वाभाविक है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं और घाट पर तैनात कर्मियों के निर्देशों का पालन करें। स्नान की व्यवस्था को लेकर प्रशासन नजर बनाए हुए है।

इस बंदी का असर केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के 15 जिलों और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 7 जिलों तक इसका प्रभाव पहुंचता है। गाजियाबाद के प्रताप विहार शोधन संयंत्र जैसे केंद्रों को कच्चे पानी की आपूर्ति कम मिलने से कुछ इलाकों में नगर निगम की जलापूर्ति पर अस्थायी असर पड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि रखरखाव पूरा होने के बाद 8 नवंबर के बाद नहर प्रणाली में सामान्य प्रवाह बहाल हो जाएगा।

हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह जानकारी राहत देने वाली है कि यह कोई प्राकृतिक संकट नहीं, बल्कि हर साल होने वाली नियोजित प्रक्रिया है। कुंभ से पहले घाटों और नहरों की मरम्मत का मकसद ही यह है कि मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुचारु स्नान व्यवस्था मिल सके। फिर भी, प्रशासन को चाहिए कि घाटों पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालु वायरल वीडियो देखकर भ्रमित न हों और उन्हें सही जानकारी मौके पर ही मिल जाए।

स्रोत: गंगा नहर बंदी पर अधिकारियों के बयान और समाचार रिपोर्टें