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पहाड़ की रफ्तार बढ़ी: कर्णप्रयाग रेल 80% पूरी, चारधाम सड़क पर तेज काम

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देहरादून, 28 अक्टूबर: उत्तराखंड में रेल और सड़क संपर्क की दो बड़ी परियोजनाओं ने रफ्तार पकड़ ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 27 अक्टूबर को बजट प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया कि सामरिक रूप से अहम कर्णप्रयाग रेल परियोजना करीब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। साथ ही चारधाम ऑल-वेदर सड़क संपर्क परियोजना और केदारनाथ-हेमकुंड सड़क पहल पर भी काम तेजी से चल रहा है। केमरी सुकृति परियोजना का सर्वेक्षण पूरा हो गया है और जल्द ही जमीनी काम शुरू होगा।

कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के लिए दशकों का सपना रही है। पहाड़ी राज्य में रेल संपर्क का मतलब केवल यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि आपदा के समय राहत पहुंचाना, सेना की आवाजाही, व्यापार और पर्यटन को नई गति देना है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यह रेल लाइन गढ़वाल के भीतरी इलाकों को मैदान से जोड़ेगी। परियोजना के 80 प्रतिशत पूरे होने की खबर का मतलब है कि अब अंतिम चरण का काम बाकी है, जिसमें सुरंगों, पुलों और स्टेशनों को अंतिम रूप देना शामिल है।

चारधाम ऑल-वेदर सड़क परियोजना का मकसद बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री तक हर मौसम में सुरक्षित सड़क संपर्क देना है। पहले बरसात और भूस्खलन के कारण यात्रा बाधित होती थी, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों दोनों को दिक्कत होती थी। चौड़ी और मजबूत सड़कों से यात्रा का समय घटेगा और हादसों का खतरा कम होगा। केदारनाथ-हेमकुंड सड़क पहल भी इसी सोच का हिस्सा है, जो ऊंचाई वाले तीर्थ क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाएगी।

इन परियोजनाओं के साथ केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान के तहत नया निर्माण भी चल रहा है। मानसखंड परियोजना, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर, हरिद्वार परियोजना और गंगा कॉरिडोर पर भी काम आगे बढ़ रहा है। इनका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित करना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। जब तीर्थयात्री बढ़ते हैं तो होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय उत्पादों का कारोबार भी बढ़ता है, जिसका सीधा फायदा पहाड़ी गांवों को मिलता है।

हालांकि, पहाड़ में निर्माण की अपनी चुनौतियां हैं — भूस्खलन, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और कठिन भूगोल। जोशीमठ के भू-धंसाव के बाद इस बात पर बहस तेज हुई है कि विकास कितनी गति से और किस तरीके से हो। सरकार का कहना है कि आपदा-रोधी निर्माण और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आम लोगों के लिए असली सवाल यही है कि ये परियोजनाएं कब पूरी होंगी और उनका फायदा पहाड़ के हर गांव तक कब पहुंचेगा। रेल और सड़क का यह जाल पूरा होने पर उत्तराखंड की तस्वीर सच में बदल सकती है।

स्रोत: मुख्यमंत्री के 27 अक्टूबर के बजट संबोधन पर आधारित समाचार रिपोर्टें