मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
मुरादाबाद। शहर के लोगों की समस्याओं को सुनने और सुलझाने के लिए बना IGRS पोर्टल अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। मुरादाबाद नगर निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वो शिकायतों का असली समाधान करने की बजाय सिर्फ कागजों पर निस्तारण करके अपनी रैंकिंग चमका रहा है। एक ऐसा ही मामला वार्ड 48 के लाजपत नगर EWS कॉलोनी से सामने आया है, जहां महज दो फीट की टूटी नाली की मरम्मत महीनों से नहीं हो पाई है।
क्या है पूरा मामला? (What)
लाजपत नगर EWS कॉलोनी में मकान नंबर बी-755 के पास मोड़ पर बनी नाली का करीब दो फीट का हिस्सा लंबे समय से टूटा पड़ा है। इससे इलाके में गंदगी फैल रही है और लोगों को रोजाना परेशानी हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश के दिनों में यहां पानी भर जाता है और कीचड़ से चलना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में एक स्थानीय निवासी ने IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर नाली की मरम्मत की गुहार लगाई। लेकिन हैरानी की बात ये है कि नगर निगम के कर्मचारियों ने बिना ठीक से जांच किए ही झूठी रिपोर्ट लगा दी।
कब और कहां हुई शिकायत? (When & Where)
यह घटना मुरादाबाद के वार्ड 48, लाजपत नगर स्थित EWS कॉलोनी की है। पहली शिकायत IGRS पोर्टल पर नंबर 40013525051086 से दर्ज की गई थी। इसके बाद आपत्ति जताते हुए दूसरी शिकायत नंबर 40013525053734 से की गई। दोनों शिकायतें नगर निगम से जुड़ी हैं और महीनों बीत जाने के बावजूद नाली की मरम्मत नहीं हुई है।
कैसे किया गया कागजी निस्तारण? (How)
पहली शिकायत पर नगर निगम के कर्मचारी ने बिना मौके पर आए और शिकायतकर्ता से मिले बिना ही रिपोर्ट लगा दी कि “शिकायतकर्ता मिला ही नहीं”। जबकि हकीकत ये है कि उस कर्मचारी की कॉल शिकायतकर्ता के मोबाइल पर आई थी और उसकी कॉल डिटेल भी सुरक्षित है।
नाराज शिकायतकर्ता ने दोबारा आपत्ति दर्ज की। इस बार एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा और शिकायतकर्ता के साथ फोटो तो खिंचवाई, लेकिन साथ ही आसपास के दूसरे जगहों की भी तस्वीरें ले लीं, जो शिकायत का हिस्सा ही नहीं थीं।
फिर रिपोर्ट में लिख दिया गया कि “यह शिकायत मांग से संबंधित है, रिपोर्ट भेज दी गई है और जब पैसा उपलब्ध होगा तब काम कराया जाएगा”। जबकि स्थानीय लोग कहते हैं कि ये कोई नई मांग नहीं है, बल्कि पहले से बनी नाली की सिर्फ मरम्मत का मामला है।
क्यों हो रहा ऐसा? (Why)
स्थानीय नागरिकों का साफ आरोप है कि नगर निगम IGRS पोर्टल पर अच्छी रैंकिंग पाने के चक्कर में शिकायतों का असली हल निकालने की बजाय कागजों पर ही निस्तारण कर रहा है। इससे पोर्टल पर तो शिकायत निस्तारित दिखती है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता। लोगों को लगता है कि उनकी समस्या सुलझ गई, लेकिन हकीकत में सब पहले जैसा ही रहता है।
ऐसे में जनता का भरोसा सरकार के इस सिस्टम से उठने लगा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर IGRS जैसा अच्छा पोर्टल क्यों सिर्फ दिखावे का शिकार बन रहा है?
कौन जिम्मेदार और आगे क्या? (Who)
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने नगर आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और टूटी नाली की जल्द मरम्मत कराने की गुहार लगाई है।
अब सबकी नजरें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं कि वो इस गंभीर आरोप पर क्या एक्शन लेता है। अगर जांच हुई और दोषी पाए गए तो कार्रवाई होगी, वरना लोगों का गुस्सा और बढ़ सकता है।
यह मामला सिर्फ एक नाली का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल है। उम्मीद है कि जल्द ही असली समाधान निकलेगा और लोगों की समस्याएं सच में हल होंगी।
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