मयंक त्रिगुण, विशेष संवाददाता
भारतीय नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के पावन अवसर पर रविवार को महानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा भव्य पथ संचलन और एकत्रीकरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महानगर की एक दर्जन से अधिक बस्तियों से निकले इस अनुशासित पथ संचलन का शहरवासियों ने विभिन्न चौराहों और मार्गों पर पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। इस दौरान पूरे शहर में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
इन स्थानों पर हुए बौद्धिक सत्र और एकत्रीकरण
पथ संचलन के साथ-साथ शहर के विभिन्न स्थानों पर स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण और बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए, जिन्हें संघ के प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया:
- मिलन विहार: महानगर प्रचार प्रमुख संजीव चौधरी
- विजय निकेतन संघ कार्यालय: भगवानदास
- राय बैंकट हॉल (सांईपुरम): विभाग व्यवस्था प्रमुख संदीप
- सामुदायिक केंद्र (प्रीत विहार): महानगर सहकार्यवाह प्रमोद
- अर्धनारीश्वर मंदिर (हिमगिरी): सुरेश ध्यानी
- सरस्वती शिशु मन्दिर (पाकबड़ा): ओम प्रकाश शास्त्री
- शहनाई मंडप (चंद्रनगर): विभाग प्रचारक ब्रजमोहन
- डिप्टी जगन्नाथ सिंह विद्यालय: रणवीर जी (बौद्धिक वक्ता)
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व
कार्यक्रम के दौरान विभाग प्रचारक ब्रजमोहन ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही भारतीय नववर्ष का आरंभ होता है और यह दिन कई दृष्टियों से अत्यंत पावन है। उन्होंने बताया कि मान्यतानुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और भगवान श्री राम के राज्याभिषेक के लिए भी इसी शुभ दिन का चयन किया गया था। इसके साथ ही, यह तिथि आर्य समाज की स्थापना, विक्रम संवत के प्रारंभ और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जन्म दिवस के रूप में भी पूजनीय है।
काल गणना प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा
महानगर प्रचार प्रमुख संजीव चौधरी ने कहा कि भारतीय काल गणना केवल समय बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर एक संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि संघ वर्ष भर में 6 प्रमुख उत्सव मनाता है, जिनका मुख्य उद्देश्य समाज को सीधे राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना है।
शताब्दी वर्ष में संघ का ‘पंच परिवर्तन’ का संकल्प
बौद्धिक वक्ता ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस अवसर पर संघ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ‘पांच परिवर्तनों’ (पंच परिवर्तन) को लेकर जन-जन के बीच जा रहा है। ये पांच मुख्य बिंदु हैं:
- सामाजिक समरसता
- कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों का जागरण)
- स्व का बोध (अपनी पहचान और संस्कृति का ज्ञान)
- नागरिक कर्तव्य
- पर्यावरण संरक्षण
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
महानगर में विभिन्न स्थानों पर हुए इन आयोजनों में मुख्य रूप से विभाग संघचालक सुरेन्द्र, महानगर संघचालक डॉ. विनीत, विपिन, डॉ. पवन जैन, प्रमोद जोशी, शरद जैन, निपेंद्र, राजेश, राजीव, आशुतोष, शानू, जितेंद्र, संजय, दिनेंद्र, भगवान दास, वरद, आदि सारस्वत और हरिमोहन गुप्ता सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।