पढ़ने देहरादून आईं थीं दो छात्राएं, 3 युवकों के साथ लिव-इन में मिलीं, हिजाब वाली फोटो से सनसनी

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उत्तराखंड की राजधानी और एजुकेशन हब कहे जाने वाले देहरादून से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां उच्च शिक्षा हासिल करने और अपने सपनों को उड़ान देने के लिए पहाड़ों से आई दो छात्राएं तीन मुस्लिम युवकों के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Dehradun Live In Case) में रहती हुई पाई गई हैं। असल में, यह घटना उन तमाम माता-पिता के लिए एक गहरी चिंता का विषय बन गई है, जो अपने बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए उन्हें अपनी नजरों से दूर शहरों में भेजते हैं।

बताया जा रहा है कि इस मामले में शामिल एक छात्रा कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी की रहने वाली है, जबकि दूसरी छात्रा गढ़वाल के चमोली जिले से यहां पढ़ाई करने के लिए आई थी। इस पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब इनकी कुछ बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि इन छात्राओं की हिजाब पहने हुए फोटो भी देखी गई है। इस एक तस्वीर ने इस पूरे मामले को महज एक लिव-इन रिलेशनशिप से निकालकर कई गंभीर सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।

पहाड़ों से देहरादून का सफर और लिव-इन की हकीकत

दरअसल, देहरादून पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा का केंद्र है, जहां हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों और खासकर उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों से हजारों छात्र-छात्राएं अपना करियर बनाने आते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, ये दोनों छात्राएं भी अपने-अपने घरों से पढ़ाई का सपना लेकर दून पहुंची थीं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन शहर की चकाचौंध और नए परिवेश के बीच ये दोनों तीन मुस्लिम युवकों के संपर्क में आ गईं।

धीरे-धीरे यह संपर्क इतना बढ़ा कि वे उनके साथ एक ही ठिकाने पर लिव-इन में रहने लगीं। अमूमन पहाड़ की संस्कृति में इस तरह की जीवनशैली को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता है। ऐसे में जब हल्द्वानी और चमोली जैसे शांत इलाकों से आई इन युवतियों की यह सच्चाई सामने आई, तो इलाके के लोगों के साथ-साथ शहर में भी तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गईं।

Dehradun Live In Case: हिजाब वाली तस्वीरों से गहराया शक

इस पूरे घटनाक्रम में जिसने हालात को सबसे ज्यादा संवेदनशील बनाया है, वह है छात्राओं की हिजाब पहने हुए तस्वीरें। जब भी इस तरह के मामलों में दूसरे धर्म के युवकों के साथ युवतियों के रहने और फिर अचानक उनकी धार्मिक वेशभूषा बदलने की तस्वीरें सामने आती हैं, तो स्वाभाविक रूप से शक की सुई कई दिशाओं में घूमने लगती है।

सूत्रों की मानें तो इन तस्वीरों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में गहरी चिंता देखी जा रही है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह सिर्फ आधुनिक जीवनशैली के नाम पर अपनाया गया लिव-इन का मामला है, या फिर इसके पीछे ब्रेनवॉश करने या कोई अन्य सोची-समझी साजिश छिपी है? पुलिस और स्थानीय प्रशासन अक्सर ऐसे मामलों पर नजर रखते हैं, लेकिन जब तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं होती, तब तक सीधी कार्रवाई में भी कई पेच होते हैं।

अभिभावकों और मकान मालिकों के लिए बड़ा अलर्ट

यह घटना सिर्फ दो छात्राओं के रास्ता भटकने की कहानी नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा अलर्ट है। यह उन मकान मालिकों और पीजी संचालकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है जो बिना उचित वेरिफिकेशन के छात्र-छात्राओं को कमरे किराये पर दे देते हैं। असल में, जब बच्चे घर से दूर होते हैं, तो उन्हें सही और गलत का फर्क समझाना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।

फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर से इस तीखी बहस को जन्म दे दिया है कि शहरों में रहकर पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। उन सभी अभिभावकों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है जिन्हें लगता है कि उनका बच्चा दूसरे शहर में सिर्फ किताबों में ही उलझा हुआ है। अब देखना यह होगा कि हिजाब और लिव-इन के इस कॉकटेल वाले मामले में आगे क्या नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं।