मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
मुरादाबाद। पूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बेहद खतरनाक अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। थाना मुंढापांडे क्षेत्र के काशीपुर-अलीगंज मार्ग पर दलपतपुर गांव में एक घर के अंदर चल रहा फर्जी पेट्रोल पंप पकड़ा गया और उसे तुरंत सील कर दिया गया। यह कारोबार इतना रिस्की था कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी।
क्या हुआ? अवैध पेट्रोल-डीजल की बिक्री का पर्दाफाश
जांच में पता चला कि इस जगह पर बिना किसी वैध लाइसेंस, एनओसी या विस्फोटक विभाग की परमिशन के पेट्रोल-डीजल स्टोर किया जा रहा था और खुलेआम बेचा जा रहा था। गांव के बीच बने आवासीय इलाके में सुरक्षा के सभी नियमों को ताक पर रखकर मशीन लगाई गई थी। पूरा गांव मानो बारूद के ढेर पर बैठा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अवैध फ्यूल स्टोरेज में जरा-सी चिंगारी भी भयानक विस्फोट का कारण बन सकती है। फिर भी महीनों से यह खतरनाक धंधा धड़ल्ले से चल रहा था।
कब और कहां हुई कार्रवाई?
पेट्रोल पंप एसोसिएशन की शिकायत मिलने के बाद जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) संजीव कुमार के निर्देश पर टीम हरकत में आई। बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे पूर्ति विभाग की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और छापेमारी की। कार्रवाई शुरू होते ही गांव में हड़कंप मच गया। लोग इधर-उधर भागने लगे।
कैसे चल रहा था यह फर्जी धंधा?
जांच में खुलासा हुआ कि बायोडीजल की आड़ में असली डीजल बेचा जा रहा था। इससे सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा था। पूरा सिस्टम बहुत प्लानिंग से चलाया जा रहा था। टीम ने मौके से करीब 900 लीटर डीजल, एक अवैध फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीन और दूसरे उपकरण बरामद किए। कोई वैध पेपर नहीं मिला।
मौके पर मौजूद सेल्समैन तामीर मियां पुत्र आमिर मियां, दलपतपुर निवासी ने कबूल किया कि वह पिछले तीन महीनों से सैलरी पर काम कर रहा था। असली मालिक कौन है, इसकी जांच चल रही है।
क्यों इतना खतरनाक था यह कारोबार?
आवासीय क्षेत्र में इतना ज्वलनशील सामान रखना अपने आप में बड़ा रिस्क था। अगर आग लग जाती तो आसपास के घर, दुकानें और लोग सब तबाह हो सकते थे। अच्छा हुआ कि समय रहते शिकायत आई और कार्रवाई हो गई।
प्रशासन ने क्या एक्शन लिया?
एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि पूर्ति विभाग की तहरीर पर मुंढापांडे थाने में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि बिना परमिशन पेट्रोल-डीजल बेचने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।
अब प्रशासन पर सवाल
इस घटना से कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। गांव के बीच महीनों तक फर्जी पेट्रोल पंप कैसे चलता रहा? क्या लोकल लेवल पर किसी की मिलीभगत थी? क्या अवैध पेट्रोल-डीजल का माफिया इससे भी बड़ा नेटवर्क चला रहा है?
जांच में क्या होगा आगे?
फिलहाल पूर्ति विभाग, पुलिस और दूसरे विभाग मिलकर पूरी जांच कर रहे हैं। डीजल के सैंपल लैब भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह कार्रवाई सिर्फ एक फर्जी पंप सील करने तक नहीं रुकेगी, बल्कि पूरे अवैध फ्यूल माफिया को कड़ी चेतावनी है।
लोगों को सलाह है कि हमेशा लाइसेंस्ड पंप से ही ईंधन भरवाएं। कोई शक हो तो तुरंत शिकायत करें। ऐसे धंधे न सिर्फ आपकी जेब काटते हैं, बल्कि जान को भी खतरे में डालते हैं।
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