हाइलाइट्स (Highlights):
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का किया भव्य शुभारंभ।
- कुल 488 महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की गई ₹2 करोड़ 76 लाख से अधिक की धनराशि।
- स्वरोजगार स्थापित करने के लिए अधिकतम 2 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर राज्य सरकार दे रही है 75 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी।
- विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ एसिड अटैक पीड़िताएं और ट्रांसजेंडर भी उठा सकते हैं योजना का लाभ।
विस्तृत खबर (Full Story):
देहरादून।
उत्तराखंड की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय (मुख्य सेवक सदन) में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सैकड़ों महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ देते हुए उनके खातों में करोड़ों रुपये की धनराशि ट्रांसफर की।
खातों में सीधे पहुंचे पैसे, खिले महिलाओं के चेहरे
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक (DBT के माध्यम से) से प्रदेश की महिलाओं के बैंक खातों में सहायता राशि भेजी। योजना का लाभ पाकर महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
आज जारी की गई धनराशि (एक नज़र में):
| विवरण | लाभार्थी संख्या | हस्तांतरित राशि | किस्त का प्रकार |
| द्वितीय चरण (नए लाभार्थी) | 212 महिलाएं | ₹ 1.55 करोड़ (लगभग) | प्रथम किस्त |
| प्रथम चरण (पुराने लाभार्थी) | 276 महिलाएं | ₹ 1.20 करोड़ (लगभग) | द्वितीय किस्त |
| कुल (आज का आंकड़ा) | 488 लाभार्थी | ₹ 2.76 करोड़ से अधिक | – |
(नोट: इससे पहले 10 फरवरी 2026 को प्रथम चरण में 484 महिलाओं को ₹3.45 करोड़ दिए गए थे।)
क्या है ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’?
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य एकल, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ एसिड अटैक पीड़िताओं, अन्य आपराधिक घटनाओं से प्रभावित महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
योजना के अंतर्गत महिलाओं को उनके स्थानीय क्षेत्र में अपना रोजगार (Business) स्थापित करने के लिए अधिकतम 2 लाख रुपये तक की परियोजना स्वीकृत की जाती है, जिसमें 75 प्रतिशत तक का अनुदान (Subsidy) राज्य सरकार की ओर से दिया जाता है।
महिलाओं को मिल रहा 30% क्षैतिज आरक्षण
सीएम धामी ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मानपूर्वक अपने पैरों पर खड़ा करना है। उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा:
- सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है।
- प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की गई है।
- 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
- लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं।
इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह योजना एकल महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास का नया अध्याय लिख रही है। कार्यक्रम में सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा समेत बड़ी संख्या में लाभार्थी महिलाएं उपस्थित रहीं, जिन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।