नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: शरद पूर्णिमा इस बार 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस रात को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। ‘को जागर्ति’ का अर्थ है — कौन जाग रहा है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो भक्त रातभर जागकर उनकी आराधना करता है, उस पर उनकी विशेष कृपा होती है। कुछ परंपराओं में इसे देवी लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
कोजागरी पूजन की विधि में शाम को स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। रात्रि में चंद्रमा के उदय के बाद देवी की पूजा करें और दीप जलाएं। परंपरा के अनुसार इस रात दूध और पोहे का भोग लगाया जाता है, जिसे चांदनी में रखकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत वर्षा होती है।
कोजागरी व्रत रखने वाले भक्त रातभर जागरण करते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं। कहा जाता है कि जो इस रात सो जाता है, वह लक्ष्मी कृपा से वंचित रह जाता है। शरद पूर्णिमा की चांदनी को वर्ष की सबसे उज्ज्वल चांदनी माना गया है। इस दिन किया गया दान-पुण्य भी विशेष फलदायी माना जाता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता / पंचांग

