मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता
मुरादाबाद : रविवार का दिन पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के लिए बेहद खास रहा। यहां एक बड़े स्तर पर फायर मॉक ड्रिल और इवैक्यूएशन ड्रिल का आयोजन किया गया, जो न सिर्फ रोमांचक था बल्कि बेहद जरूरी भी। इस ड्रिल का नेतृत्व डॉ. आर.के. पांडेय ने किया, जो मुरादाबाद के सीएफओ हैं। कल्पना कीजिए, पूरा कॉलेज परिसर धुंध और सायरन की आवाजों से गूंज रहा था, और सैकड़ों ट्रेनीज अपनी जान बचाने की प्रैक्टिस कर रहे थे। ये ड्रिल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आजकल आग की घटनाएं आम हो गई हैं, और ऐसे में तैयार रहना ही सबसे बड़ा हथियार है।
ड्रिल की शुरुआत और तैयारी
सुबह से ही पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में हलचल मची हुई थी। रविवार होने के बावजूद सभी ट्रेनीज उत्साह से तैयार थे। डॉ. आर.के. पांडेय ने खुद कमान संभाली और टीम को निर्देश दिए। इस तरह के ड्रिल का मकसद है कि लोग असली आपदा में घबराएं नहीं और सही तरीके से रिएक्ट करें। मुरादाबाद जैसे शहर में, जहां इंडस्ट्री और घनी आबादी है, आग की घटनाएं कभी भी हो सकती हैं। इसलिए, पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग देना जरूरी है ताकि वे न सिर्फ खुद को बचाएं बल्कि दूसरों की मदद भी कर सकें। ड्रिल शुरू होते ही सायरन बजे, और सबको लगा जैसे असली आग लग गई हो। लेकिन ये सब प्लान्ड था, ताकि रियल लाइफ में कोई गलती न हो।
इस मॉक ड्रिल में कुल 1470 प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया। ये ट्रेनीज पुलिस की विभिन्न ब्रांच से थे, और उन्होंने अग्नि सुरक्षा के उपायों पर फोकस किया। सबसे पहले, उन्हें बताया गया कि आग लगने पर क्या करना चाहिए – जैसे कि अलार्म बजाना, निकलने के रास्ते ढूंढना और एक-दूसरे की मदद करना। इवैक्यूएशन की प्रक्रिया में वे सुरक्षित रूप से बाहर निकलने का अभ्यास कर रहे थे। कल्पना कीजिए, इतने सारे लोग एक साथ दौड़ रहे हैं, लेकिन व्यवस्थित तरीके से। कोई धक्का-मुक्की नहीं, सब ऑर्डर में। ये दृश्य देखकर लगता है कि तैयारी कितनी मजबूत है। ऐसे ड्रिल से ट्रेनीज का कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वे रियल इमरजेंसी में बेहतर परफॉर्म कर पाते हैं।
प्रशिक्षण सेशन: एक्सपर्ट्स से सीखीं टेक्निक्स
ड्रिल के दौरान प्रशिक्षण का हिस्सा सबसे दिलचस्प था। FSSO मोहित कुमार और स्वतंत्र कुमार ने अग्निशमन स्टाफ के साथ मिलकर ट्रेनीज को ट्रेनिंग दी। उन्होंने अग्निशमन की तकनीकों पर विस्तार से बात की – जैसे कि फायर एक्सटिंग्विशर कैसे यूज करें, आग के प्रकार क्या होते हैं और उन्हें कैसे बुझाएं। रेस्क्यू टेक्निक्स में बताया गया कि अगर कोई फंस गया हो तो उसे कैसे निकालें, बिना खुद को खतरे में डाले। आपदा से निपटने की कार्यप्रणाली पर भी फोकस रहा, जहां ट्रेनीज ने सीखा कि टीम वर्क कितना महत्वपूर्ण है।
मोहित कुमार ने बताया कि आग की घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें धुंध से होती हैं, इसलिए मास्क और सही रास्ते का इस्तेमाल जरूरी है। स्वतंत्र कुमार ने प्रैक्टिकल डेमो दिए, जहां ट्रेनीज ने खुद ट्राई किया। जैसे कि रस्सी से नीचे उतरना या लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां यूज करना। ये सब आसान लगता है, लेकिन प्रैक्टिस के बिना मुश्किल हो जाता है। स्टाफ ने ये भी समझाया कि घर या ऑफिस में ऐसे ड्रिल क्यों करवाने चाहिए। मुरादाबाद में पहले भी कई आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जैसे फैक्ट्री फायर, इसलिए ये ट्रेनिंग पुलिसकर्मियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। ट्रेनीज ने उत्साह से हिस्सा लिया और कई ने कहा कि अब वे ज्यादा कॉन्फिडेंट फील कर रहे हैं।
क्यों जरूरी हैं ऐसे ड्रिल?
आज के समय में आपदाएं अनप्रेडिक्टेबल हैं। क्लाइमेट चेंज से आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, और शहरों में इमारतें ऊंची हो रही हैं। ऐसे में इवैक्यूएशन ड्रिल से लोग सीखते हैं कि पैनिक न करें। पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज जैसे जगहों पर ये और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस वाले फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स होते हैं। वे अगर ट्रेंड होंगे तो समाज को ज्यादा सेफ रख पाएंगे। डॉ. पांडेय ने ड्रिल के बाद कहा कि ये नियमित रूप से होने चाहिए ताकि कोई कमी न रहे। 1470 ट्रेनीज का हिस्सा लेना दिखाता है कि प्रशासन कितना सीरियस है।
इस ड्रिल से न सिर्फ ट्रेनीज को फायदा हुआ बल्कि ये एक मैसेज है पूरे शहर के लिए। लोग घर पर भी छोटे-मोटे ड्रिल कर सकते हैं – जैसे कि फायर अलार्म चेक करना या एक्सिट प्लान बनाना। मुरादाबाद पुलिस की ये पहल सराहनीय है और उम्मीद है कि दूसरे जिलों में भी ऐसे आयोजन होंगे। कुल मिलाकर, ये ड्रिल सफल रहा और सभी ने इसमें से कुछ न कुछ सीखा।
ड्रिल का प्रभाव और भविष्य
ड्रिल खत्म होने के बाद ट्रेनीज में एक अलग ही एनर्जी थी। वे अब रियल लाइफ में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। अग्निशमन स्टाफ ने भी सराहना की कि ट्रेनीज कितने एक्टिव थे। ऐसे आयोजनों से न सिर्फ स्किल्स बढ़ती हैं बल्कि टीम स्पिरिट भी मजबूत होती है। मुरादाबाद में ये पहला ऐसा बड़ा ड्रिल नहीं है, लेकिन इतने बड़े स्केल पर जरूर खास था। भविष्य में और ऐसे प्रोग्राम प्लान किए जा सकते हैं, जैसे कि एडवांस रेस्क्यू ट्रेनिंग।
अंत में, ये ड्रिल याद दिलाता है कि सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। छोटी-छोटी बातों से बड़ी दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज ने एक मिसाल कायम की है, और उम्मीद है कि ये ट्रेंड जारी रहेगा।
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