मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
UP Lawyers Criminal Cases–प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में वकीलों की दुनिया में बड़ा उलटफेर होने वाला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी बार काउंसिल ने साफ-साफ कह दिया है कि जो वकील पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर हैं या गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हैं, उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। यानी ऐसे वकीलों का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। यह फैसला कोर्ट में एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है, जिसने खुद पुलिस कांस्टेबल पर मारपीट का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट को उसके आपराधिक इतिहास का पता चल गया।
याचिका की पूरी कहानी क्या है?
यह मामला इटावा के एक वकील की याचिका से शुरू हुआ। याची ने आरोप लगाया कि एक पुलिस कांस्टेबल ने उनके साथ मारपीट की और धमकाया। ट्रायल कोर्ट ने उनकी शिकायत खारिज कर दी, जिसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को याची के आपराधिक बैकग्राउंड के बारे में बताया। पता चला कि याची के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिसमें यूपी गैंगस्टर एक्ट भी शामिल है।
इस पर हाईकोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने बार काउंसिल से पूछा कि आपराधिक मुकदमों में फंसे वकीलों के बारे में क्या कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने全省 स्तर पर ऐसे वकीलों की लिस्ट मांगी।
बार काउंसिल ने क्या जवाब दिया?
यूपी बार काउंसिल ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर या गैंगस्टर के रूप में सूचीबद्ध वकीलों के प्रैक्टिस लाइसेंस को सस्पेंड करने का फैसला लिया जा चुका है। काउंसिल ने ऐसे वकीलों की सूची भी कोर्ट में पेश की, जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है।
काउंसिल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 5,14,439 अधिवक्ता बार काउंसिल में नामांकित हैं। इनमें से सिर्फ 2,49,809 वकीलों को ही सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) जारी किया गया है, यानी इतने ही वकील सक्रिय रूप से प्रैक्टिस कर सकते हैं और बार काउंसिल के चुनाव में वोट दे सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2,539 अधिवक्ताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों की कुल संख्या 3,139 है। मतलब, प्रदेश में हजारों वकील ऐसे हैं जिन पर क्रिमिनल केस चल रहे हैं।
कोर्ट ने सरकार को क्या निर्देश दिए?
हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि हर अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी डिटेल्स के साथ पूरक हलफनामा दाखिल किया जाए। इसमें एफआईआर की तारीख, क्राइम नंबर, धाराएं, जांच की स्थिति, चार्जशीट और ट्रायल का स्टेटस सब शामिल होना चाहिए।
कोर्ट ने बार काउंसिल को भी सभी सीओपी जारी किए गए वकीलों की डिटेल्स वाली पेन ड्राइव पेश करने का समय दिया है, ताकि क्रॉस चेक किया जा सके। राज्य सरकार का अनुपालन हलफनामा और जिला वार लिस्ट भी कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है।
अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को तय की गई है। तब तक सरकार और बार काउंसिल को सारी जानकारी जमा करनी होगी। कोर्ट ने साफ कहा कि कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह मामला वकीलों की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है। आखिर कानून के रखवालों पर ही अगर क्रिमिनल केस हों, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। हाईकोर्ट का यह कदम वकालत पेशे को और ज्यादा पाक-साफ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। क्या इससे दागी वकीलों पर नकेल कसेगी? देखना दिलचस्प होगा।
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