मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता
मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) के वाइस चेयरमैन अनुभव सिंह के खिलाफ कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है। एक किसान की जमीन के पूरे भुगतान न करने के आरोप में अदालत ने उनके कार्यालय को कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ये मामला किसान और प्राधिकरण के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद का है, जहां किसान का आरोप है कि उनकी जमीन अधिग्रहण के बाद पूरा मुआवजा नहीं मिला। कोर्ट ने न सिर्फ ऑफिस कुर्क करने का आदेश दिया, बल्कि वीसी के आचरण को भी आपत्तिजनक बताते हुए उन्हें 18 नवंबर को तलब किया है। ये खबर मुरादाबाद में सनसनी फैला रही है, क्योंकि MDA जैसे बड़े संगठन के टॉप अधिकारी पर ऐसी कार्रवाई नई है।
कोर्ट का सख्त रुख: कार्यालय कुर्क के आदेश
मुरादाबाद की सिविल कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान MDA के वीसी अनुभव सिंह के ऑफिस को कुर्क करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसान की जमीन का पूरा भुगतान न करने का मामला गंभीर है। ये जमीन MDA की विकास योजनाओं के तहत ली गई थी, लेकिन किसान का दावा है कि वादा किया गया मुआवजा आंशिक ही मिला। कोर्ट ने इसे प्राधिकरण की लापरवाही माना और तुरंत कुर्की की कार्रवाई के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर भुगतान न हुआ तो आगे की सख्त कार्रवाई हो सकती है। ये आदेश न सिर्फ वीसी के लिए झटका है, बल्कि पूरे MDA के लिए सवाल खड़ा कर रहा है। किसान संगठनों ने इसे अपनी जीत बताया है, जबकि प्राधिकरण की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
मामला तब और गहरा हो गया जब कोर्ट ने अनुभव सिंह के आचरण पर सवाल उठाए। जज ने सुनवाई में कहा कि वीसी का व्यवहार आपत्तिजनक है, क्योंकि उन्होंने किसान की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि 18 नवंबर को वीसी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। अगर वो हाजिर नहीं हुए तो उनके खिलाफ अवमानना का केस दर्ज हो सकता है। ये फैसला मुरादाबाद के किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कई किसान संगठन इसे विकास प्राधिकरणों की मनमानी के खिलाफ बड़ा कदम बता रहे हैं। एक किसान नेता ने कहा, “कई सालों से हमारी जमीनें ली जाती हैं, लेकिन मुआवजा पूरा नहीं मिलता। ये फैसला हमें हौसला देगा।”
किसान का दर्द: अधिग्रहण के बाद अधूरा भुगतान
ये विवाद एक साधारण किसान की जमीन से शुरू हुआ, जो MDA की नई कॉलोनी या बुनियादी ढांचे की परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। किसान का कहना है कि प्राधिकरण ने जमीन ले ली, लेकिन वादा किया गया पूरा पैसा नहीं दिया। आंशिक भुगतान तो हुआ, लेकिन बाकी रकम पर बहाने बनाए जाते रहे। कोर्ट में केस दायर होने के बाद कई सुनवाइयां हुईं, लेकिन प्राधिकरण ने समय पर जवाब नहीं दिया। अब कुर्की के आदेश से किसान को न्याय मिलने की उम्मीद है। मुरादाबाद में ऐसी कई शिकायतें आती रहती हैं, जहां विकास के नाम पर किसानों की जमीनें ली जाती हैं, लेकिन मुआवजा में देरी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये केस अन्य मामलों के लिए मिसाल बनेगा।
प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। MDA के अधिकारी अब कोर्ट के आदेश का पालन करने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन वीसी अनुभव सिंह पर दबाव बढ़ रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला सालों पुराना है और कई बार सुनवाई टली। कोर्ट ने अब समयसीमा तय कर दी है। किसान पक्ष के वकील ने बताया कि कुर्की की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी, जिसमें ऑफिस की संपत्ति सील हो सकती है। ये कदम न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि वीसी की छवि पर भी सवाल खड़े करेगा।
आगे की कार्रवाई: 18 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
18 नवंबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट वीसी से पूरा जवाब मांगेगा। अगर संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिला तो जुर्माना या अन्य सजा हो सकती है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर भुगतान न हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन होगा। मुरादाबाद जिले में पहले भी MDA के खिलाफ किसान विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, खासकर जमीन अधिग्रहण को लेकर। इस बार कोर्ट का साथ मिलने से किसानों का हौसला बढ़ा है। जिला प्रशासन ने भी शांति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
ये घटना उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों के लिए चेतावनी है। कई जगहों पर किसानों की जमीनें ली जाती हैं, लेकिन मुआवजा समय पर न मिलने से विवाद बढ़ते हैं। मुरादाबाद MDA का ये मामला सुर्खियों में है, और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, किसान को न्याय मिलने की राह दिख रही है, लेकिन प्राधिकरण की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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