मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता
लखनऊ/मुरादाबाद। यूपी सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए मुरादाबाद नगर निगम के उप नगर आयुक्त राजकिशोर प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि अलीगढ़ में तैनाती के दौरान उन्होंने नगर निगम की कीमती सरकारी जमीन को अवैध तरीके से एक्सचेंज करवा दिया। यह पूरा खेल बिना किसी जांच-पड़ताल और बिना अनुमति के सिर्फ एक एनओसी देकर कर दिया गया।
कौन हैं राजकिशोर प्रसाद और क्या हुआ?
राजकिशोर प्रसाद उस समय अलीगढ़ नगर निगम में उप नगर आयुक्त थे और विधि विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास था। आरोप है कि उन्होंने कोल तहसील के गांव धौर्रा माफी की गाटा संख्या-345 की बहुमूल्य जमीन को गाटा संख्या-342 से एक्सचेंज करवाने के लिए अदालत में अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) दे दिया। यह जमीन पहले से ही नगर निगम की थी और उस पर 10 फीट ऊंची दीवार, गेट और बोर्ड भी लगा हुआ था।
कब और कहां हुआ पूरा मामला?
यह घटना अलीगढ़ की है। साल 2017 में धौर्रा माफी गांव को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया था। इसके बाद 16 जनवरी 2024 को अपर जिलाधिकारी (नगर) अलीगढ़ की अदालत ने राजकिशोर प्रसाद की दी गई एनओसी के आधार पर दोनों गाटा नंबरों को आपस में एक्सचेंज कर दिया और राजस्व रिकॉर्ड में भी बदलाव कर दिया गया।
कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राजकिशोर प्रसाद ने:
- बिना राजस्व अभिलेख देखे
- बिना विभागीय रिपोर्ट लिए
- बिना जमीन की मौजूदा स्थिति चेक किए
- बिना स्वामित्व की पुष्टि किए
सीधे अदालत में एनओसी दे दी। जबकि नियम के मुताबिक पहले से निगम के कब्जे वाली जमीन का एक्सचेंज बिल्कुल गैरकानूनी है। दोनों गाटाटों पर पहले से ही आबादी भी बसी हुई थी। इस एक गलत एनओसी से सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ।
आखिर क्यों निलंबित किया गया?
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने इसे बेहद गंभीर अनियमितता माना। शासन को जैसे ही अलीगढ़ नगर निगम से पूरी रिपोर्ट मिली, फौरन निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। साथ ही नियम-7 के तहत विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच अधिकारी अलीगढ़ के अपर आयुक्त (प्रशासन) को बनाया गया है।
निलंबन के दौरान राजकिशोर प्रसाद को लखनऊ के नगर निकाय निदेशालय से अटैच कर दिया गया है। जांच पूरी होने तक वे किसी भी सरकारी काम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
मुरादाबाद में भी विवादों में रहे राजकिशोर (पहले भी लगा चुके हैं विवाद)
ये कोई पहला मौका नहीं है जब राजकिशोर प्रसाद सुर्खियों में आए हों। मुरादाबाद में कांशीराम कॉलोनी में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक व्यक्ति की दीवार गलत तरीके से तोड़ दी गई थी। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया था। इसके बाद उनसे संपत्ति विभाग का चार्ज छीन लिया गया था।
साथ ही आरोप लगा था कि उन्होंने जांच करने आए अधिकारियों से अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था। उस मामले की रिपोर्ट भी शासन को भेजी जा चुकी है और वह जांच अभी भी चल रही है।
अब आगे क्या?
शासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन से छेड़छाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अलीगढ़ की जिस जमीन को एक्सचेंज किया गया, उसे वापस नगर निगम के नाम कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद राजकिशोर प्रसाद पर और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है – यहां तक कि बर्खास्तगी भी।
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