मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
अमरोहा। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत अमरोहा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। डिडौली पुलिस और 25 हजार के इनामी बदमाश कलीम के बीच हुई मुठभेड़ ने यह साफ कर दिया है कि कानून के रक्षकों पर हाथ डालना अब अपराधियों के लिए महंगा साबित होगा। यह एनकाउंटर केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस न्याय व्यवस्था की जीत है जिसके एक कर्मचारी को बेरहमी से मार दिया गया था।
नीलीखेड़ी पुल के पास ‘खूनी खेल’ का अंत
बुधवार की देर रात अमरोहा के डिडौली थाना क्षेत्र के नीलीखेड़ी पुल के पास सन्नाटा तब टूटा जब पुलिस और बाइक सवार बदमाश का आमना-सामना हुआ। पुलिस को सूचना मिली थी कि तीन दिन पहले जज के पेशकार की हत्या में शामिल मुख्य आरोपी कलीम पुत्र रहीस इलाके में छिपा है।
पुलिस ने जब उसे रुकने का इशारा किया, तो अपराधी ने खुद को घिरता देख फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में ‘योगी पुलिस’ की गोली कलीम के पैर में लगी, जिससे वह वहीं ढेर हो गया। पुलिस ने घायल अवस्था में उसे अस्पताल पहुंचाया, जहाँ उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
पेशकार की मौत: वह कांड जिसने हिला दी थी अमरोहा की न्यायपालिका
आज से ठीक तीन दिन पहले, अमरोहा में कानून के एक कर्मचारी (जज के पेशकार) को जिस तरह पीट-पीटकर मौत के घाट उतारा गया था, उसने पूरी न्यायिक बिरादरी में रोष पैदा कर दिया था। इस घटना के बाद से ही अमरोहा पुलिस पर भारी दबाव था। पुलिस कप्तान ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी कलीम पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस मुठभेड़ के साथ ही पुलिस ने 72 घंटों के भीतर इस जघन्य हत्याकांड का हिसाब बराबर कर दिया है।
तमंचा, कारतूस और ‘क्राइम’ का कच्चा चिट्ठा
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से अपराध में इस्तेमाल होने वाला साजो-सामान भी बरामद किया है। मौके से पुलिस को मिले:
- एक अवैध तमंचा (315 बोर)
- एक खोखा व दो जिंदा कारतूस
- वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल
आरोपी कलीम डिडौली थाना क्षेत्र के ही हुसैनपुर का रहने वाला है और इलाके में उसका काफी खौफ था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस हत्याकांड में और कितने लोग शामिल थे और कलीम को छिपने में किसने मदद की।
खाकी का इकबाल: न्याय व्यवस्था में लौटा भरोसा
डिडौली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के बीच कड़ा संदेश भेजा है। स्थानीय लोगों और न्यायिक कर्मचारियों में इस एनकाउंटर के बाद राहत की लहर है। अधिवक्ता और कोर्ट कर्मचारी इस कार्रवाई को ‘सच्चा न्याय’ बता रहे हैं। पुलिस की इस दबिश ने साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अपराध करने के बाद भागना नामुमकिन है।