मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
Minimum Temperature in Moradabad Record-आज मकर संक्रांति के उत्सव पर आस्था भारी है, लेकिन कुदरत का मिजाज उससे भी कहीं अधिक सख्त। दिल्ली ने आज न्यूनतम तापमान के मामले में पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। 3 डिग्री सेल्सियस की कड़कड़ाती ठंड ने राजधानी को किसी हिल स्टेशन की तरह जमा दिया है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कल यानी 15 जनवरी को आने वाला ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) इस सूखी ठंड से निजात दिलाएगा या मुश्किलें और बढ़ाएगा?
2023 के बाद सबसे ‘क्रूर’ जनवरी: दिल्ली का जमाव बिंदु
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि आज का तापमान 2023 के उस रिकॉर्ड की याद दिला रहा है जब पारा 1.4 डिग्री तक गिर गया था। पिछले दो दिनों से चल रही ‘शीत लहर’ (Cold Wave) ने हवाओं में नमी को सोख लिया है, जिससे ‘सूखी ठंड’ (Dry Cold) का प्रकोप बढ़ गया है। यह ठंड शरीर की हड्डियों तक को कंपा देने वाली है क्योंकि हवा की गति और उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाओं का सीधा प्रहार दिल्ली के मैदानी इलाकों पर हो रहा है।
आसमान में 100 मील की रफ्तार: ‘जेट स्ट्रीम’ का अदृश्य हमला
इस साल की ठंड सामान्य से अधिक क्यों है? इसका जवाब बादलों के ऊपर छिपा है। उत्तर भारत के ऊपर करीब 100 समुद्री मील की रफ्तार से ‘पश्चिमी जेट स्ट्रीम’ चल रही है। यह बर्फीली हवाओं की एक ऐसी नदी है जो हिमालय की ठंड को सीधे खींचकर मैदानी इलाकों में डंप कर रही है। इसके साथ ही मन्नार की खाड़ी और उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने ‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ ने मौसम के चक्र को उलझा दिया है।
15 जनवरी की रात से क्या बदलेगा?
IMD (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) के अनुसार, कल रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। 15 जनवरी से 20 जनवरी के बीच का समय बेहद महत्वपूर्ण है।
- बादलों की आवाजाही: नया विक्षोभ आते ही तापमान में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि बादल पृथ्वी की गर्मी को बाहर नहीं जाने देंगे।
- धुंध का नया स्पेल: पश्चिमी विक्षोभ के कारण नमी बढ़ेगी, जिससे घनी धुंध (Dense Fog) की वापसी होगी। यह यात्रियों और ट्रेनों के परिचालन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
- पहाड़ों पर बर्फबारी: हिमाचल और कश्मीर में इस विक्षोभ के कारण भारी हिमपात की संभावना है, जिसका असर अगले सप्ताह मैदानी इलाकों में ‘गलन’ के रूप में दिखेगा।
साइक्लोनिक सर्कुलेशन का ‘त्रिकोणीय’ जाल
वर्तमान में देश में तीन प्रमुख मौसमी प्रणालियाँ सक्रिय हैं:
- हिमाचल का विक्षोभ: जो पहाड़ों पर बर्फबारी को नियंत्रित कर रहा है।
- उत्तर-पश्चिमी यूपी का सर्कुलेशन: जो दिल्ली और हरियाणा में हवा की दिशा बदल रहा है।
- मन्नार की खाड़ी का सिस्टम: जो दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में नमी भेज रहा है। इन तीनों के मेल से उत्तर भारत में एक ऐसा प्रेशर जोन बना है, जिसने ठंड को एक ही जगह स्थिर (Stagnant) कर दिया है।
हेल्थ अलर्ट: 20 जनवरी तक संभलकर रहें
डॉक्टरों और मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 20 जनवरी तक आसमान में बादल और कोहरे का मिला-जुला असर रहेगा। चूंकि धूप कम निकलेगी, इसलिए ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह ‘सूखी ठंड’ सांस की बीमारियों का कारण बन सकती है।